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AI-Generated Deepfakes and the Law: Who Is Liable?


परिचय

आज Artificial Intelligence (AI) ने तकनीक की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। AI की मदद से तस्वीरें, वीडियो और आवाज़ को इस तरह बदला जा सकता है कि असली और नकली के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। इसी तकनीक का एक खतरनाक रूप Deepfake है।

Deepfake तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन और रचनात्मक कार्यों के लिए भी किया जा सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा खराब करने, धोखाधड़ी करने, अश्लील सामग्री बनाने, राजनीतिक भ्रम फैलाने या लोगों को गुमराह करने के लिए भी किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह है—अगर किसी व्यक्ति का Deepfake बनाया या वायरल किया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?

Deepfake क्या है?

Deepfake ऐसी AI-generated या digitally manipulated सामग्री है जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज़ या शरीर को बदलकर उसे किसी ऐसी गतिविधि में दिखाया जाता है जो उसने वास्तव में नहीं की होती।

उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के चेहरे को किसी दूसरे वीडियो पर लगाकर ऐसा वीडियो बनाना जिसमें वह कोई आपत्तिजनक या गैरकानूनी काम करता हुआ दिखाई दे।

Deepfake से जुड़े कानूनी अपराध

Deepfake के मामलों में परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग कानून लागू हो सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति की पहचान या निजी जानकारी का दुरुपयोग किया जाता है, तो Information Technology Act, 2000 के प्रावधान लागू हो सकते हैं। यदि Deepfake का इस्तेमाल धोखाधड़ी, धमकी, मानहानि या अश्लील सामग्री के लिए किया गया है, तो संबंधित आपराधिक कानूनों के तहत भी कार्रवाई संभव हो सकती है।

भारत में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 के अंतर्गत भी अपराध की प्रकृति के अनुसार संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।


कौन हो सकता है जिम्मेदार?

Deepfake मामले में जिम्मेदारी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। मुख्य रूप से:

1. Deepfake बनाने वाला व्यक्ति

यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी की छवि या आवाज़ का दुरुपयोग करके नकली सामग्री बनाता है और उससे नुकसान पहुंचाता है, तो वह कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।

2. Deepfake को फैलाने वाला व्यक्ति

जो व्यक्ति जानबूझकर ऐसी सामग्री को सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर शेयर या वायरल करता है, वह भी परिस्थितियों के अनुसार जिम्मेदार हो सकता है।

3. धोखाधड़ी करने वाले अपराधी

यदि Deepfake का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की आवाज़ या पहचान की नकल करके पैसे ऐंठने या किसी को धोखा देने के लिए किया जाता है, तो यह गंभीर साइबर अपराध का रूप ले सकता है।

4. Online Platforms
सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें लागू कानूनों और सरकारी निर्देशों के अनुसार शिकायतों पर कार्रवाई और गैरकानूनी सामग्री को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ सकता है।


पीड़ित व्यक्ति क्या कर सकता है?

यदि किसी व्यक्ति का Deepfake बनाया गया है, तो उसे:

तुरंत उस सामग्री के screenshots और URLs सुरक्षित रखने चाहिए।

संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर report करना चाहिए।

साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

गंभीर मामलों में पुलिस में FIR दर्ज कराने पर विचार करना चाहिए।

मानहानि या अन्य कानूनी नुकसान होने पर उचित कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

Deepfake तकनीक ने कानून के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। AI का विकास रोकना संभव नहीं है, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून, तकनीक और डिजिटल जागरूकता का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि AI तकनीक स्वयं अपराधी नहीं है; उसका दुरुपयोग करने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से जिम्मेदार हो सकता है। इसलिए Deepfake के मामलों में जिम्मेदारी तय करते समय यह देखना आवश्यक है कि सामग्री किसने बनाई, किस उद्देश्य से बनाई, किसने उसे फैलाया और उससे 
किस प्रकार का नुकसान हुआ।

डिजिटल युग में AI का जिम्मेदार इस्तेमाल ही सुरक्षित इंटरनेट की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

Vanshika Tomar

Advocate, Legal Content Writer and Dedicated Teacher.

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